चिपलूणकर और सलीम ख़ान का मेरे ब्लॉग पर मेल
१९९२ के दौर में वाराणसी के तीन भिन्न – भिन्न विचारधाराओं से जुड़े़ तीन समूहों ने महसूस किया था कि साम्प्रदायिकता के बारे में एक समझदारी बना कर साथ – साथ लोगों के बीच जाना होगा । समझदारी बनाने के क्रम में हमने तीन लम्बे सत्रों में चर्चा की...
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अफ़लातून
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[11 Oct 2009 08:08 AM]



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