ज़हन में कौंधती एक सोच...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! कहते हैं कि दुनिया में इंसानों को कभी भी मन माफ़िक चीज़ें नहीं मिलतीं क्योंकि इंसान एक सामाजिक प्राणी है. सामाजिक प्राणी होने का इंसानों के लिए यह दायरा बहुत सोच समझकर बनाया गया है. अगर इंसानों को उनकी मांग के हिसाब से चीज़ें मिलने लगें तो यह दायरा सिमट... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम

चलते-चलते

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[06 Oct 2009 06:39 AM]

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