न अब हौसला है न अब रस्ते हैं

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! रुखसत होकर बैठे हैं ऐसे के खुशियाँ मिली हों ज़माने की जैसे, नुमाइश भी कोई नहीं करने वाला सूरत भी नहीं मेरी दीवाने के जैसे, मैं चुपचाप सहमा हूँ बैठा कहीं पे कोई भी नहीं है मुझे सुनने वाला, सभी पूछते हैं हुआ क्या है तुझको तेरी शक्ल क्यों है रुलाने के ज... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम

मेरी बात

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[07 Oct 2009 12:36 PM]

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