कोई तो कारण रहा होगा

zakhm क्यूँ तेरी याद फिर आई है लगता है तुमने मुझे पुकारा है किस दर्द ने फिर दस्तक दी है तभी तो हूक मेरे दिल में भी उठी है तेरे गम से जुदा मेरा दर्द कब था तेरी इक आह पर दर्द मेरा सिसकता है लगता है फिर कोई ज़ख्म उधड गया है तभी तो तेरी इक सिसकी पर रूह मेरी कसम... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[13 Oct 2009 09:32 AM]

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