सोचो सोचो सोचो
सब चीजों को धूप सुखाये लेकिन हमें भिगोती हम तो हरदम भीगे रहते छाया जो न होती चलो खुजाओ सभी खोपड़ी है कैसी ये माया इस बात को वही बताए जिसको पसीना आया...
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पवन *चंदन*
पसीना धूप छाया
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[08 Oct 2009 10:13 AM]



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