अपना अपना जोग भया
दुख दारु सुख रोग भया दारु दारु उन्माद हुआ दुख न हुआ प्रमाद हुआ गीतों में ढल कर शाद हुआ किर्चों से मिल कर नाद हुआ खुशबू में बँट आबाद हुआ दुख दारु सुख रोग भया अपना अपना जोग भया poems...
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शारदा अरोरा
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[11 Oct 2009 02:35 AM]



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