पंकज सुबीर जी- जन्मदिन शुभ हो

गीतकार की कलम भाल टीका लगाती रहे जयश्री हो कथा सत्यनारायणी आँगना दीप्त हो आपकी राह, हर मोड़ पर और बाधाओं से हो नहीं सामना हर सितारा चले चाल अनुकूल ही औ’ दिशायें सभी आपकी मित्र हों जो क्षितिज पर बनें भोर में सांझ में आपके ही सभी रंगमय चित्र हों द्वार गूँजे सदा प्रीत... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
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[11 Oct 2009 12:29 PM]

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