दुर्घटना से देर भली!

vyanjana कुछ लोगों का कहना है कि कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियां देखकर लगता है कि ये खेल दो हज़ार दस में न होकर, मानो दस हज़ार दो में होने हों। ऐसा कहने वालों के संस्कृति-बोध पर मुझे तरस आता है। ये लोग शायद भारत की कार्य-संस्कृति से वाक़िफ नहीं हैं। मेरा मानना ह... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज बधवार

हास्य-व्यंग्य(हास्य-व्यंग्य)

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[13 Oct 2009 02:34 AM]

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