फुरसतिया जी ने सही कहा यह चिट्ठाकारी तो निन्यानवे का फेर है.......और हम पड़े 99 के चक्कर में ?
वैसे फुरसतिया जी ने सही कहा यह चिट्ठाकारी तो निन्यानवे का फेर है, जो न फंसा वही सुखी। जो फंस गया वो बेचारा टिप्पणियों और ब्लॉग को हिट करने के चक्कर में दुबला हुआ जाता है। यों तो निन्यानबे का चक्कर मुहावरों में बहुत पहले से चला आ रहा है कबीर ने कहा ’’...
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प्रवीण त्रिवेदी PRAVEEN TRIVEDI
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[08 Oct 2009 18:30 PM]



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