दुनीति केरि पथ मे अछि भाग्य केर गाडी़
दुनीति केरि पथ मे अछि भाग्य केर गाड़ी कवि- श्री हरिश्चन्द्र झा दुनीति केरि पथ मे अछि भाग्य केर गाड़ी, पारे कोना उतरतै चिन्तें शरीर कारी । धारा विलोकि विह्वल सुत वृन्द मातृ नोरक वलिदान केरि वेदी, चढ़िगेल पुत्र कोरक। प्रलयोक ज्वाल सहि कए दए गेल रत्न भा...
[पूरी पोस्ट]
आदि यायावर
10
0
0
0
4
[14 Oct 2009 10:06 AM]



Shuffle








