नही मानेगी वो अब...
सुर्ख गालों पे भंवर आज भी आते होंगे उस हँसी पर कई मर आज भी जाते होंगे जबीं को अब भी कोई जुल्फ सताती होगी ज़हनो-दिल में कई अरमान जगाती होगी उन निगाहों के दिए आज भी जलते होंगे अब भी आंखों में कई दर्द मचलते होंगे अब भी पलकों में कोई ख्वाब सजाया होगा खुश...
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हिमांशु बाजपेयी
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[08 Oct 2009 04:55 AM]



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