तिमिर बहुत गहरा होता है..........
तिमिर बहुत गहरा होता है रात चाद जब नभ मे खोता तारों की झुरुमुट मे सोता मेरी भी बाहों मे कोई,अनजाना सा भय होता है यादों के जब दीप जलाता उतना ही है तम गहराता छुप गोदी मे मॆ सो जाता ,शून्य नही देखो आता है कही नीद की मदिरा पाता पी उसको हर आश भुलाता रक्त...
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vikram7
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[07 Oct 2009 08:29 AM]



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