शहर पार अजनबी .. एक मोंताज़ , चीन की दीवार

प्रत्यक्षा पत्थर के चौकोर टुकड़ों पर हाथ फिराते बार बार खुद को याद दिलाया , ये इतिहास का एक हिस्सा है और इसे छूते ही मैं उस समय से इस समय तक खिंचा तार हूँ । नीचे पेड़ों के झुरमुट से चमकते शीशे जैसा लाल रंग कौंधता है । लड़की अपनी आँखें मींचे हँसती है और बूढ़ी औरत बा... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[10 Oct 2009 06:06 AM]

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