चाँद रात --रूमानी चाँद (भाग _२)
रूमानी चाँद (भाग _१) आपने पढ़ा और पसंद किया ,शुक्रिया चाँद रात .. मेरी नजरों .... की चमक .... तेरी नजरों ... में बंद ... कोई चाँद सी रात है .. उलझे हुए से धागे में कोई जीने की सौगात है .. और जब यह तेरी नजरें ... ठहरतीं हैं ..... मेरे चेहरे पर ठिठक कर...
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रंजना [रंजू भाटिया]
कुछ यूँ ही .चाँद रात
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[06 Oct 2009 04:16 AM]



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