मैंने म.प्र. प्रलेस इसलिए छोड़ा- ज्ञानरंजन

आज़ाद लब ज्ञानरंजन का नाम साहित्य जगत में बड़े आदर के साथ लिया जाता है. उनके सम्पादन में हाल-फिलहाल तक निकलनेवाली प्रतिष्ठित लघु-पत्रिका 'पहल' का महत्त्व किसी से छिपा नहीं है. एक कथाकार के रूप में ज्ञान जी ने हिन्दी साहित्य को कई अनमोल कहानियां दी हैं. वह मध्... [पूरी पोस्ट]
writer विजयशंकर चतुर्वेदी
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[05 Oct 2009 08:01 AM]

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