देखा है ज़िन्दगी को...
देखा है ज़िन्दगी को कुछ इतना क़रीब से । चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से ।। कहने को दिल की बात जिन्हें ढूंढ़ते थे हम, महफ़िल में आ गए हैं वो अपने नसीब से । नीलाम हो रहा था किसी नाज़नीं का प्यार, क़ीमत नहीं चुकाई गई एक ग़रीब से । तेरी वफ़ा की लाश पर ला...
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रामकृष्ण गौतम
ग़ज़ल
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[05 Oct 2009 06:35 AM]



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