मेरी दादागिरी :-)

दिल ये छोटा सा, छोटी सी आशा.... चाँद-तारों को छूने की आशा.... पिछले सन्डे जब हम पिज्जा हट गए थे. वहां मुझे सोफे पर बैठना बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहा था. मम्मी बार बार मुझे उठा कर सोफे बैठाती और मैं फिर उतर कर भाग जाती. मम्मी भी समझती नहीं है, मुझे एक जगह बैठने की बजाय खेलना और घूमना ज्यादा पसंद है. दरअसल मुझे वहा... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• लविज़ा | Laviza ●๋•

नए स्वाद

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[02 Sep 2009 12:45 PM]

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