अमर प्रेम -----------अन्तिम भाग

एक प्रयास गतांक से आगे ......................... अब अर्चना गहन अंधकार और निराशा में डूबती चली गई और दिन पर दिन खामोश होती चली गई । उसके जीने की इच्छा ही जैसे खत्म होती चली गई । धीरे- धीरे उसकी सेहत गिरने लगी । समीर डॉक्टर को दिखाता , एक से बढ़कर एक इलाज कराता... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[05 Oct 2009 02:28 AM]

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