तुम कौन सी शाख के मोर हो जी

फुरसतिया कल सुबह दक्षिण भारत की तबाही के सीन टेलिविजन पर देखे। जगह-ए-तबाही से इत्ती दूर फ़िर भी देखकर लगा कि कुदरत भन्नाई हुई है। कोई भन्नाया हुआ आका तबादले में किसी को कहीं किसी को कहीं पटक देता है। तबादलित कर देता है। वैसे ही प्रकृति भी मनमौजी है। पानी मांग... [पूरी पोस्ट]
writer फ़ुरसतिया

बस यूं ही

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[05 Oct 2009 00:51 AM]

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