पुनर्पाठ...तुम्हारा..

Shreesh UVACH १) मै; तुम्हे शिद्दत से चाहता हूँ, पर तुम नहीं. आत्मविश्वास ने समाधान किया: 'सफल हो जाने पर कौन नहीं चाहेगा मुझे,,,? "....पर उन्ही लोगो में पाकर क्या मै चाह सकूँगा ..तब..तुम्हे..?  (२) तुमने जब टटोला तो मैंने महसूस किया.. अपना अस्तित्व सर पर हाथ... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीश पाठक 'प्रखर'
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[04 Oct 2009 23:54 PM]

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