तुम चुपके से आ जाना
तुम चुपके से आ जाना " सूरज जब मद्धम पड़ जाये और नभ पर लाली छा जाये शीतल पवन का एक झोंका तेरे बिखरे बालों को छु जाए चंदा की थाली निखरी हो तारे भी सो कर उठ जाए चोखट की सांकल खामोशी से निंदिया की आगोश में अलसाये बादल के टुकड़े उमड़ घुमड़ द्वारपाल बन चोक्...
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seema gupta
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[04 Oct 2009 23:52 PM]



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