संत कबीर वाणी-हीरे की जौहरी और शब्द की परख साधु को होती (heera aur shabd-sant kabir vani)
हीरा न तहां न खोलिए, जहं खोटी है हाट। कसि करि बांधो गांठरी, उठि करि चालो बाट।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अपने हीरे को उस बाजार में मत खोलिए जहां खोटी नीयत वाले उपस्थित हैं। उसे तो अपनी गांठ में कसकर अपनी राह चल दीजिए। हीरा परखै जौहरी, शब्दहि...
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दीपक भारतदीप
dharm
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[04 Oct 2009 23:45 PM]



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