सुरेश की स्मृति में...

पाल ले इक रोग नादां जिंदगी के वास्ते... आज की शाम तय थी वैसे तो एक बर्थ-डे बैश के लिये, किंतु नियती ने कुछ और ही तय कर रखा था। वो इकतीस का होता आज। अभी उस 22 सितम्बर की सुबह तक तो हमने आज के इस शाम की बातें की थी...एक खास डांस-स्टेप की बात, जो उसे सिखना था...जो मुझे सिखाना था। मिलेट्री हास... [पूरी पोस्ट]
writer गौतम राजरिशी
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[04 Oct 2009 20:31 PM]

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