फलसफा जिंदगी का

साहित्‍य - संस्‍कृति ईटीसी लंबे समय बाद एक बार फिर अपने इस ब्लॉग में प्राणवायु डालने का प्रयास कर रहा हूं। शनिवार को दिल्ली से प्रकाशित एक दैनिक अखबार में प्रकाशित निदा फाजली की ये पंक्तियां दिल को छू गईं। आप भी पढ़कर देखिए, शायद अच्छी लगें - घर की तामीर चाहे जैसी हो इसमें रोन... [पूरी पोस्ट]
writer manglam
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[04 Oct 2009 16:07 PM]

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