मानवता का बलात्कार या संस्कृति की रक्षा ..
भाई बात कुछ इस तरह है की बहुत दिन हो गए जमाना अपनी रफ्तार में आगे बढा जा रहा है और हम हैं की लाइफ में कोई ट्विस्ट ही नहीं। ॥ कोई काम भी नहीं है और अन्दर दिल में बैठी कुंठित उर्जा जवानी में कुछ कर गुजरने के लिए कह रही है,कोई मुद्दा भी नहीं मिला की तोड़...
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रूपम
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[04 Oct 2009 14:19 PM]



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