क्या सूरज हमारी स्मृतियों का लाइब्रेरियन है?

जो देखा भूलने से पहले सुबह का सूरज कहीं छोड़ कर आया दोपहर कहीं खोल आया दरवाजा वह शाम के लिए चमकता आकाश ने ली जैसे एक लंबी सांस दिन खुला मेरी बंद आँखों के भीतर मैं जनमा फिर कल आज कल के दर्पण में © मोहन राणा... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन राणा - Mohan Rana
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[04 Oct 2009 12:28 PM]

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