वो जो इक शाइर था..

खामोश पहलू ... तुमने इक मोड़ पर अचानक जब मुझको 'गुलज़ार' कहके दी आवाज़ एक सीपी से खुल गया मोती मुझको इक मानी मिल गए जैसे 'गुलज़ार'.. इस नाम को किसी त्आर्रुफ़ की ज़रूरत नहीं.. एक अलग अंदाज़.. एक अलग-अंजान सी तरतीब.. एक सफ़ेद कुरता.. एक पुराना चश्मा.. और दरिया के जैस... [पूरी पोस्ट]
writer केतन कनौजिया 'शाइर'

कुछ यूँ ही...

views
21
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
6
[04 Oct 2009 09:41 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix