एक व्यंग्य: अनावरण एक(गांधी) मूर्ति का...

व्यंग....... नेता जी ने अपनी गांधी-टोपी सीधी की।रह रह कर टेढी़ हो जाया करती है। विशेषत: जब वह सत्ता सुख से वंचित रहते हैं।धकियाये जाने के बाद टेढी़ ,मैली-कुचैली हो जाती है।समय-समय पर सीधी रखना एक बाध्यता हो जाती है,अन्यथा विरोधी दल ’टोपी-कोण" पर ही हंगामा शुरू कर... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[04 Oct 2009 09:08 AM]

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