ये कैसा है पोरुष तेरा

zakhm ये कैसा है पोरुष तेरा ये कैसा है दंभ अबला की लुटती लाज देख जो बहरा बन , मूक हो नज़र चुरा चला जाए करुण पुकार भी न जिसका ह्रदय विदीर्ण कर पाए फिर ये कैसा है पोरुष तेरा ये कैसा है दंभ अत्याचारों की बानगी देख असहाय , निर्दोष की हृदयविदारक चीख सुन भी जो सि... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[04 Oct 2009 07:32 AM]

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