उसे साँप ने नहीं काटा था .....

भारतीय भुजंग यादों के वातायन में पहुँचता हूँ -करीब ३० साल पहले ! बगल के गाँव से गुजर रहा था ! कुछ भीड़ और चिल्ल पों सुनायी पडी तो मुड़ गया उधर -क्या देखता हूँ कि एक महिला अभुआ (विक्षिप्त ,विश्रिन्खल हो प्रलाप करना )  रही थी  -कई लोग उसे संभाले हुए, मगर... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[04 Oct 2009 06:50 AM]

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