आलों में लुप्त ज़िन्दगियों का भान : नवीन सागर
मैं अक्सर सोचता हूं – एक कहानी लिखूं, जिसका नाम हो - नवीन सागर. एक कविता लिखूं, जिसका शीर्षक हो – नवीन सागर. एक आवाज़ दूं – नवीन ! अब तक यह कहानी नहीं लिखी. न ही यह कविता लिखी है और न ही पिछले नौ साल से यह आवाज़ दी है – नवीन ! . डर लगता है - वह कहानी न...
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raajkumar keswani
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[04 Oct 2009 00:16 AM]



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