कभी ख़ुद पे, कभी हालात पे रोना आया...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! कभी ख़ुद पे, कभी हालात पे रोना आया । बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया ॥ हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को । क्या हुआ आज, यह किस बात पे रोना आया ? किस लिए जीते हैं हम, किसके लिए जीते हैं ? बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया ॥ कौन रोता है किसी और की ख़ा... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम
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[03 Oct 2009 08:40 AM]

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