तुहमत वो हम पर...............(बवाल)
आपकी तारीफ़ में, जो हम क़सीदे पढ़ चले तालियों के सिलसिले, तड़ तड़ तड़ा-तड़ तड़ चले उल्फ़तों की राह में, जो हम ज़रा सा बढ़ चले बस, ज़माने भर की नज़रों में, सरासर गड़ चले हम परिन्दे थे, ज़माना बेरहम सैयाद था क़ैद में भी पर हमारे, फड़ फड़ा-फड़ फड़ चले वो झलक थी आपकी, जिस प...
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बवाल
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[03 Oct 2009 02:31 AM]



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