असुविधा
विरूद्ध पता नहीं किस-किस के विरूद्ध कौन सी रणभूमि में निरन्तर कटते-कटाते संघर्ष रत रोज लौट आते अपने शिविर में श्रांत-क्लांत रक्त स्वेद मिट्टी में सने घाव के अनगिन निशान लिये न जीत के उल्लास में मदमस्त न हार के नैराष्य से संत्रस्त। कोई आकस्मिक घटना नह...
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अशोक कुमार पाण्डेय
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[03 Oct 2009 01:52 AM]



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