मुरली तेरा मुरलीधर 22
दुख का मुकुट पहन कर तेरे सम्मुख सुख आता मधुकर सुख का स्वागत करता तो दुख का भी स्वागत कर निर्झर सुख न रहा तो दुख भी तेरे साथ नहीं रहने वाला टेर रहा क्रीड़ाविशारदा मुरली तेरा मुरलीधर।।121।। प्रेम भिखारी न उससे कुछ भी...
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हिमांशु । Himanshu
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[02 Oct 2009 21:10 PM]



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