कविता: मेरे घर का पता
पूछे कोई मेरे घर का पता उन सीमाओं में, जिन के दोंनो ओर मेरे अपने ही रहते हैं । वो उन ज़मीनों का नाम लेंगे जहाँ मेरी गरीबी पर परिहास किया गया था । वो उस मिट्टी को पुकारेंगे जो मेरी सच्चाई की कब्रगाह है । वो उन पर्वतों की ओर देखेंगे जो कभी मानवता के आगे...
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Deepak Kumar
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[02 Oct 2009 06:13 AM]



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