श्राद्ध की थाली पर महंगाई की मार

चेतना के स्वर उजाले की ओर प्रदीपसिंह बीदावत एक जमाना था जब श्राद्धपक्ष में पंडितजी के पेट का खास ध्यान रखने के लिए यजमान मालपुए, खीर और हलवे समेत कई मीठे व्यंजन मनोयोग से तैयार करवाते थे। अब स्थिति ऎसी है कि मीठे के नाम पर शक्कर के भाव सुनते ही गुड़ के चूरमे से काम चलाना पड़... [पूरी पोस्ट]
writer चेतना के स्वर
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[02 Oct 2009 05:37 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix