गाँधी-स्मृति में......

मेरी रचनाएँ १. मैं थोडा उत्तेजित हूँ, दो अक्टूबर !  गाँधी का जन्मदिन समाधि पर फूल चढाने और कुछ क्षण शांत मौन खडा सोचता, "क्या यहाँ कभी कोई आता भी है और भी किसी दिन?" शायद ! गाँधी कि याद में "गाँधी" टंका रह गया है? या फिर गाँधी के मरने के बाद, हे! राम क... [पूरी पोस्ट]
writer महफूज़ अली
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[02 Oct 2009 04:18 AM]

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