कोई मरने से मर नहीं जाता
सोचते हो कि ये नहीं होगा ? आसमां एक दिन ज़मीं होगा ! कोई मरने से मर नहीं जाता देखना वो यहीं कहीं होगा न जाने कबसे इस अनूठी शायरी का दीवाना बना बैठा हूं. यह इजलाल मजीद की शायरी है. एक ऐसा शायर जो अपने बारे में चाहे जितना कम बोले मगर उसकी शायरी इस शख्स...
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raajkumar keswani
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[01 Oct 2009 23:30 PM]



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