बापू माफ़ कर दो
विदेश में उनके चश्मे की नीलामी की ख़बर लग्गी तो कल्लन भी गुल्लक तोड़ के तैयार हो गए। सब मिल के खरीद लेंगे हमारी चीज़ है। पर अब इसका क्या करें, बापू की अपनी औलादें ही बापू को बेच रही हैं। विश्वव की सबसे उम्दा कलम बनने वाली कंपनी ने ७२ लाख का अनुदान दे...
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rajkumar jha
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[01 Oct 2009 21:05 PM]



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