एक आत्‍मस्‍वीकारोक्ति के बहाने कुछ सवाल

बेदखल की डायरी ये मेरी डायरी का बहुत अंतरंग पन्‍ना है। इतना अंतरंग कि कई बार मैं खुद भी उससे नजरें मिलाने से बचती रही हूं। कुछ बहुत अंतरंग और हमविचार मित्रों को छोड़कर मुझे दुनिया के सामने यह स्‍वीकारने में भयानक संकोच था। संकोच इसलिए नहीं था कि मैं मुझ जैसी हूं, ब... [पूरी पोस्ट]
writer मनीषा पांडे
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[01 Oct 2009 12:38 PM]

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