तन्हाई तो होती है तन्हाई में ...
सितम्बर का महिना उफ्फ्फ भयावह ... काफी दिनों से गूरू जी के आने का इंतज़ार कर रहा था बेशब्री से मगर ऊपर वाले ने मिलना नही लिख रखा था , अजीबो गरीब हादसे एक पे एक मन को झकझोर के रख दिया था ... खैर ज़िंदगी है और ये सब तो वाजिब ही है ...उधर गूरू भाई गौतम क...
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"अर्श"
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[01 Oct 2009 12:35 PM]



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