ठोकरें

वागर्थ ठोकरें कविता वाचक्नवी हर नदी के गर्भ में कैसा तराशा रूप लेकर हम चले थे, आपकी ठोकर हथोड़ों, दूमटों ने तोड़कर या फोड़कर आडा़ हमें तिरछा किया है। (अपनी पुस्तक "मैं चल तो दूँ" - २००५ से )... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
views
15
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
3
[01 Oct 2009 10:51 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix