एक खामोश कवि की अग्नि-ऋचाएँ

जनशब्द नई पीढ़ी. के कवियों में राकेश प्रियदर्शी ने अपनी काव्यात्मक सोच और धार की बदौलत समकालीन कविता जगत में अपनी पहचान कायम की है। उनकी नवीनतम कृति ‘इच्छाओं की पृथ्वी के रंग’ में एक संवेदनशील दृष्टि के साथ मानवीय चिंताओं के प्रति बेचैनी और छटपटाहट स्पष्ट द... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द श्रीवास्तव
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[01 Oct 2009 09:27 AM]

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