वो जो बिछडे हैं कब मिले हैं फ़राज़ ......
फिर किसी राहगुज़र पर शायद... वो कभी मिल सकें मगर शायद......... आज ये ग़ज़ल मुझे न जाने किस दुनिया में ले गयी! सारे वो चेहरे जिनके साथ कभी न कभी जिंदगी के बहुत खूबसूरत पल बिताये हैं, अचानक से जेहन में कौंध गए! जिन दोस्तों के बिना शायद ये जिंदगी ऐसी न हो...
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pallavi trivedi
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[01 Oct 2009 03:38 AM]



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