अर्श और फर्श के बीच का अन्तराल.......!
कहते हैं गत कर्मों का फल यहीं मिला करता है शायद यह सच भी है ! प्रकृति बार बार सचेत कराती है आओ ! अपने साथ हो रहे घटित से सबक लो....! अहंकार में मदमस्त मानव अर्थ और काम में मस्त हो खुद को लुटते देखकर भी होश में जाने कब आये क्या पता........? उसे संजीवन...
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हेमन्त कुमार
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[30 Sep 2009 19:58 PM]



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