यो मे प्रतिबलो लोके
एकालाप यो मे प्रतिबलो लोके तुम तो त्रिलोक के स्वामी हो. तुमने देवों को जीता है. सब रत्न तुम्हारे चरणों में. सब पर अधिकार तुम्हारा है. तुमने ऐरावत छीन लिया
बिगडे घोड़ों को साधा है.
धरती पर्वत आकाश वायु
पाताल सिंधु को बाँधा है. तुमने मुझको भी रत्न कहा...
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कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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[30 Sep 2009 19:46 PM]



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