यो मे प्रतिबलो लोके

Beyond The Second Sex (स्त्रीविमर्श) एकालाप यो मे प्रतिबलो लोके तुम तो त्रिलोक के स्वामी हो. तुमने देवों को जीता है. सब रत्न तुम्हारे चरणों में. सब पर अधिकार तुम्हारा है. तुमने ऐरावत छीन लिया बिगडे घोड़ों को साधा है. धरती पर्वत आकाश वायु पाताल सिंधु को बाँधा है. तुमने मुझको भी रत्न कहा... [पूरी पोस्ट]
writer कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
views
12
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
1
[30 Sep 2009 19:46 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix