'आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे'
कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएँगे, आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे, हटने के नहीं पीछे, डर कर कभी जुल्मों से, तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे." - -अशफ़ाक उल्ला खाँ भारत की आज़ादी का इतिहास अविस्मरणीय घटनाओं से भरा पड़ा है. लाखों - करोड़ों...
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गुर्रमकोंडा नीरजा
स्रवंति
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[30 Sep 2009 15:14 PM]



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