रोशनी किस जगह से काली है

बाजे वाली गली फज़ल ताबिश नाम के इस ज़िन्दादिल इंसान को कभी कोई ‘उर्दू ज़ुबान का बांका शायर’ कहता है तो कोई ‘ख़ूबरू पठान और ख़ूबतर इंसान’. मुझे तो अब तक नहीं मालूम मैं उन्हें क्या कहूं. उनकी और मेरी उम्र में कोई 17 साल का फासला था मगर हमेशा बराबरी से दोस्तों का सा सुलूक... [पूरी पोस्ट]
writer raajkumar keswani
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[30 Sep 2009 10:18 AM]

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